कभी कभी जिंदगी तू समझ नहीं आता
जो दिल चाहता है वह मिल नहीं पाता
एक वक़्त था ऐसा जब हम भी खुश थे
हस्ते थे हम भी जब यारों के संग थे
जीते थे ज़िन्दगी एक शान से जैसे
पर एक मोड़ जीवन में आया ऐसे
सब छूट गया पीचे कुछ था नहीं जैसे
अब ऐएत्बार नहीं रहा ज़िन्दगी तुझपे
क्या करू मैं अब बस नहीं मेरा मुझपे
किस मोड़ पर मिलेंगे वो यार फिर मुझसे
ख्वाहिश एक ही है, ऐ ज़िन्दगी अब तुझसे
Tuesday, May 11, 2010
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2 comments:
good attempt, I must say!
oji..likha baandh kyun karr diye ji...likhte raho plz
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